Tuesday, February 1, 2011

एक हवा जो उनकी महक लाती है .....!!!!!

फिर उन दिनों कि याद आ गयी 
जब किसी कि याद में हम खोया करते थे!
वो ठंडी भरी रातें 
जब बहुत कम रातों में सोया करते थे!
उन हवाओं में उनके बदन कि महक होती थी 
जो हवा के रुख को बदल देती थीं !
ऐ हवा आज क्यों उनकी कमी तेरे जेहन में लगती है
क्या मेरी तरह तेरा भी दीदार उनसे नहीं होता 
इसलिए आजकल मेरा दिल हवा कि महक में नहीं  खोता!
जब तू आती है तो ,थोडा उनके घर भी जाया कर 
उनको साथ नहीं लेकिन उनकी महक ही लाया कर....!! 
आज दिल करता है उन्ही पलो में वापस लौट जाऊ
लेकिन आज के पलो को वो एहसास कैसे दिलाऊ!
जब उनकी नज़रों से इन नज़रों का दीदार होता था 
इस फिजा में अलग ही एहसास होता था !
लगता है इस दिल ने खुद को समझाना सीख लिया
जिस गम में तड़पते था शायद उसे दवाना सीख लिया! 
मुझे अब भी लगता कि हवा कभी तो अपना रुख मोड़ेगी
मेरे दिल की बात को उन तक छोड़ेगी  
उस पल में मेरी ही बात कि खनक होगी
शायद उस एहसास में उनकी ही महक होगी....!!!!!!!!

Monday, January 31, 2011

61 के गणतंत्र में 61% प्रगति भी नहीं....

बीते दिनों भारत के गणतंत्र ने अपने ६१ वर्ष पूरे किये है ,लेकिन देश में आज़ादी के बाद से प्रगति भी कुछ ज्यादा नहीं हुई है ! जब भारत ब्रिटिश शासन का का गुलाम था तब हम आजादी कि लड़ाई लड़ रहे थे और जब सन १९४७ में देश को स्वाधीनता मिली तब लक्ष्य रह गया कि देश को प्रगति कि राह पर लाना है ...........देश में इन ६४ वर्षो में प्रगति तो हुई लेकिन उस प्रगति को देश में हो रहे घोटालों/भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी गतिविधियों ने बोना बना दिया है ....
भारत को आजादी तो मिल ही गयी , देश का संबिधान भी लागू हो गया,लेकिन आज देश के लोकतंत्र कि जड़ें कमजोर होती  नजर आ रही है , आज भ्रष्टाचार आतंकवाद जैसी समस्याओं ने देश को अपना आशियाना बना लिया है आये दिनों दिनों देश के किसी ना किसी कोने में यह समस्याएं नए रूप में विकृत हो रही है चाहे वह २ स्पेक्ट्रम हो या आदर्श घोटाला इन सभी गतिविधियों ने देश को शर्मसार किया है भारत आज विकासशील देशो में शामिल तो हो गया लेकिन अभी तक विकसित  नहीं हो पाया है ! आज देश में लोगो की सबसे बड़ी परेशानी बनी है महंगाई जिसने सभी वर्गों के लोगो के नाक में दम कर दिया है! महंगाई आये दिनों हवा में उड़ रही है,सभी क्षेत्रो में महंगाई ने अपने प्रकूप को फैला रखा है चाहे वह खाद्य क्षेत्र हो,शिक्षा क्षेत्र हो या ईधन (डीजल,पेट्रोल,रसोई गैस) क्षेत्र  हर तरफ महंगाई की मार है !
जब तक आमजन की जिंदगी में ख़ुशी नहीं रहेगी अर्थात देश की प्रजा ही खुशहाल  नहीं रहेगी तो देश कहा से प्रगति करेगा! जब तक देश में इन सभी प्रमुख समस्याओं पर लगाम नहीं लगेगी तब तक ना तो महंगाई कम होगी होगी ना ही देश विकसित होगा क्योकि देश की स्थिति किसी से छुपी नहीं है!!

Friday, January 21, 2011

कहने कि हिम्मत जुटा रहा हू.....!!!!!!

कब से कहने कि हिम्मत जुटा रहा हू कि, तुमसे मोहब्बत है कितनी,
जाने आज ऐसा क्या हुआ है कि, दिल ने कहा कि कह ही डालू,
जब किताबों के पन्नो कि सफेदी तुम्हारे चेहरे पर चमकती है, दिल रुक सा जाता है,
जब हंसी कि एक ठंडी लहर मेरे कानो तक आती है, वक़्त थम सा जाता है ,
जाने आज ऐसा क्या हुआ कि , दिल ने कहा कह ही डालू कितनी मोहब्बत है तुमसे !!

युवा खिलाडियों से सजी धोनी सेना......

१९ फरवरी २०११ से एशिया में शुरू हो रहे विश्व कप के दसवे महासंग्राम के लिए धोनी बिग्रेड कि घोषणा कर दी गई है,चयनकर्ताओं ने घोषित कि गई टीम पर भरोसा जताते हुए कहा है कि यह टीम सर्वश्रेष्ट संभावित टीम है यह हमारे लिए विश्वकप जीत सकती है ! विश्वकप के लिए घोषित कि गई संभावित टीम में १५ खिलाडियों के नामो को शामिल किया गया है इस टीम में वे ९ खिलाड़ी भी शामिल है जो पहले भी विश्वकप में अपना जलवा बिखेर चुके है लेकिन आश्चर्य कि बात यह कि इन संभावितो में करेला एक्सप्रेस एस श्रीसंत व युवा बल्लेबाज़ रोहित शर्मा को जगह नहीं दी गई है और बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा पर भी चयन कर्ताओं ने भरोसा नहीं जताया है वही पियूष चावला और तमिलनाडू के स्पिनर आर आश्विन को टीम में जगह दी गई है ,विश्वकप के लिए भारतीय टीम में तीन स्पिनर,एक आलराउंडर युसूफ पठान समेत सात बल्लेबाज़,तथा एक विकेटकीपर धोनी को शामिल कर टीम को संतुलित बनाया गया है
अब यह टीम संतुलित है या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन रोहित शर्मा और एस श्रीसंत का चयन किस आधार पर नहीं किया गया जबकि इन दोनों खिलाडियों ने अपने प्रदर्शन से अपने आप को साबित किया है यह बात चयन करता ही अच्छी तरह से जानते है !
यह विश्वकप भारत के लिए सबसे महतवपूर्ण रहेगा क्योकि यह विश्वकप टीम के सबसे अनुभवी खिलाडी सचिन तेंदुलकर के लिए अंतिम विश्वकप होगा और टीम के सभी खिलाडियों कि कोशिश रहेगी कि यह विश्वकप जीते और सचिन को एक खुबसूरत विदाई दे !
एशिया में हो रहे इस विश्वकप कि मेजवानी भारत के साथ साथ बंगलादेश और श्रीलंका को भी दी गयी! इस विश्वकप के सेमीफायनल और फायनल को मिलकर ६०-७० प्रतिशत मैच भारत में ही खेले जायेंगे उम्मीद है भारतीय पिचों से परिचीत भारतीय खिलाड़ी इसका फायेदा उठाएंगे तथा विश्वकप भारत के नाम करेंगे!!.......
हम सभी कि शुभकामनाएं भारतीय टीम के साथ है ....... 

भारत को वो जलवा अब फिर वापस दिखाना है ,
सभी टीमो को धुल चटाकर विश्व कप भारत ही लाना है........ 

Monday, January 17, 2011

कब कटेगी यह महंगाई की पतंग......!!

आज कलयुग धीरे-धीरे महंगाई युग में तब्दील हो रहा है! जिस तरह से महंगाई अपने पैर पसार रही है समाज के सभी वर्गों पर बुरा असर हो रहा है,महंगाई कि ये पतंग आज इतनी ऊपर उड़ रही कि इसके पक्के मांजे को काटना मुश्किल हो रहा है, कब इस पतंग कि उड़ान थमेगी और लोगो को राहत मिलेगी ये कहना अभी बहुत मुश्किल है.!
पिछले एक दशक में महंगाई कि दर बहुत ज्यादा बड़ी है !व्यक्ति के खाने से लेकर हर प्रकार कि वस्तुओं पर महंगाई का प्रभाब पड़ा है,सरकार कि समस्त प्रकार कि योजनायें इस मंगाई के आगे नतमस्तक हो गई है ! आये दिनों ईधन(डीजल,पेट्रोल,रसोई गैस) और समस्त खाद्य सामग्रीयो के दाम बढ रहे है और वही सरकार आश्वाशन  दे रही है कि महंगाई कम होगी ! क्यों ये झूठा आश्वाशन जनता को राहत देता है,लगता है आज समाज ने परिस्थितियों से लड़ने कि वजाए उसमे ढलना सीख लिया है जो कि बहुत ही दयनीय है! आज देश में भ्रष्टाचार इतना बढ गया है कि उसको समाप्त करने में सरकार विफल होती नजर आ रही है,देश में हो रहे भ्रष्टाचार महंगाई का सबसे बड़ा कारण है!
देश कि सम्पूर्ण आर्थिक अर्थ व्यवस्था डगमगा गई है,सरकारी तंत्र विफल होते नजर आ रहे है,राजनेताओं के सम्पूर्ण शौक सरकारी खजानों से पूरे हो रहे है और यहाँ आमजन महंगाई कम होने कि ताक लगाये बैठा है जब तक देश में भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी तब तक महंगाई का कम होना नामुमकिन सा है !
महंगाई से आज आमजन का बजट गड़बड़ा गया है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो या अन्य क्षेत्र हर तरफ महंगाई कि मार है! आज क्रषि का  क्षेत्र  भी महंगाई से प्रभाबित है,ना तो अच्छे बीज मिल रहे है ना ही उच्च कोटि कि कीटनाशक दावा मुहैया हो पा रही है जिससे फसलो को खासा नुकसान हो रहा है,जिससे भारतीय अर्थ व्यवस्था प्रभाबित हो रही है!
जिस दिन से देश में भ्रष्टाचार का ग्राफ कम होने लगेगा,महंगाई दर कम हो जाएगी!!  
लखपति हो गया करोडपति,गरीब हो गया बेघर 
दिल कहता ऐ-खुदा अब लगाम लगा इस महंगाई पर!!                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     

Sunday, January 16, 2011

ठंडी फिजा में घुल रही है हल्की हल्की गर्मी..........

 जब भी इस मौसम में बदलाव आता है दिल को पता नहीं क्यों अलग सा सुकून मिलता है,अलविदा कहती ठण्ड और दस्तक देती गर्मी  लगता है कुछ अलग एहसास दे रही है ....पिछले दो दिनों में थोडा गर्मी का एहसास  हुआ मौसम का ये बदलाव तो प्राकृतिक नियम है पर जब हम ठण्ड के दिनों में रहते है तो गर्मी की याद आती है और जब गर्मी के मौसम लुफ्त लेते है तो याद आता है  वो रजाई के अन्दर में दुवकना!!
अलविदा कहती ठण्ड अब शायद गर्मी की नीबू सिकंजी की याद दिला रही है,आने वाली गर्मी में अलग ही मौसम का लुफ्त होगा वो दिन भर का तपता सूरज,शाम की वो ठंडी ठंडी हवा, वो मजा कुछ और ही होगा!!
लेकिन आज के दिन जो ठण्ड थी शायद लगा की अभी नीबू सिकंजी के लिए इंतज़ार अभी बाकी है,अभी तो ये बदन को छूने  वाली सूरज की किरने बहुत ही मखमली लग रही है शायद गर्मी में यही किरने बन्दूक की गोली की तरह शरीर पर बरसती है तब लगता है कि क्यों ये गर्मी आ गयी इससे अच्छे  तो हम सर्दियों में ही सूरज से अटखेलियाँ करते थे !!
मौसम चाहे जो भी हो सब का अपना अलग ही एक मजा होता है!! 
दस्तक दे रहा दूसरा मौसम,ठंडी फिजा लग रही गरम
आ रहा है बसंत का मौसम,आओ मिलकर कहे स्वागतम!!



Thursday, January 13, 2011

क्या जरुरी है फिल्मो में फूहड़ता......

फिल्मो में फूहड़ता का प्रदर्शन आज अपने चरम पर पहुँच गया है,लगता है आज की पीड़ी का मनोरंजन का फूहड़ता के बिना अधूरा हो गया है आज भारतीय फिल्मो  में इस कदर की अश्लीलता दिखाई जा रही है  जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी!
भारतीय फिल्मो में इतिहास से लेकर आज वर्तमान तक अदभुत परिवर्तन हुआ है जहाँ कभी पहले पूरे परिवार के साथ किसी फिल्म का आनंद लिया जाता था आज वही किसी फिल्म को पूरे परिवार के साथ देखना दुर्लभ हो गया है!!
आज व्यक्ति इस फूहड़ता को अपने जीवन की जरुरत समझ बैठा जो की उसकी एक बड़ी भूल है तथा भारतीय संस्कृति के लिए यह बहुत ही शर्मनाक बात है जिस तरह भोजन करते समय सब्जी के बिना रोटी खाने का आनंद अधूरा होता है उसी तरह आज की फिल्मे भी फूहड़ता के बिना अधूरी मानी जाती है समाज में उपजी ये गलत मानसिकता बहुत ही तर्क हीन है! आज फिल्मे व्यंगात्मक हो चाहे सामाजिक विचारों पर आधारित लेकिन उसमे फूहड़ता जरुरी हो गई है समाज को दिशा,ज्ञान और निर्देश देने वाली फिल्मे आज फूहड़ता तक ही सिमट कर रह गई है!!
आज नेता हो या अभिनेता फ़िल्मी अंदाज़ में ही बात करता है फिल्मो का समाज पर इतना असर हुआ है की वह आज फ़िल्मी मानसिकता के बाहर काम करना ही पसंद नहीं करता है आज जरुरत है की जागरूकता पूर्ण तथा ज्ञान वर्धक फिल्मो का समाज में अर्जन हो जिस से समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े ना की अश्लीलता दिखकर नकारात्मक मानसिकता का विकास!