Sunday, January 16, 2011

ठंडी फिजा में घुल रही है हल्की हल्की गर्मी..........

 जब भी इस मौसम में बदलाव आता है दिल को पता नहीं क्यों अलग सा सुकून मिलता है,अलविदा कहती ठण्ड और दस्तक देती गर्मी  लगता है कुछ अलग एहसास दे रही है ....पिछले दो दिनों में थोडा गर्मी का एहसास  हुआ मौसम का ये बदलाव तो प्राकृतिक नियम है पर जब हम ठण्ड के दिनों में रहते है तो गर्मी की याद आती है और जब गर्मी के मौसम लुफ्त लेते है तो याद आता है  वो रजाई के अन्दर में दुवकना!!
अलविदा कहती ठण्ड अब शायद गर्मी की नीबू सिकंजी की याद दिला रही है,आने वाली गर्मी में अलग ही मौसम का लुफ्त होगा वो दिन भर का तपता सूरज,शाम की वो ठंडी ठंडी हवा, वो मजा कुछ और ही होगा!!
लेकिन आज के दिन जो ठण्ड थी शायद लगा की अभी नीबू सिकंजी के लिए इंतज़ार अभी बाकी है,अभी तो ये बदन को छूने  वाली सूरज की किरने बहुत ही मखमली लग रही है शायद गर्मी में यही किरने बन्दूक की गोली की तरह शरीर पर बरसती है तब लगता है कि क्यों ये गर्मी आ गयी इससे अच्छे  तो हम सर्दियों में ही सूरज से अटखेलियाँ करते थे !!
मौसम चाहे जो भी हो सब का अपना अलग ही एक मजा होता है!! 
दस्तक दे रहा दूसरा मौसम,ठंडी फिजा लग रही गरम
आ रहा है बसंत का मौसम,आओ मिलकर कहे स्वागतम!!



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