फिर उन दिनों कि याद आ गयी जब किसी कि याद में हम खोया करते थे!
वो ठंडी भरी रातें
जब बहुत कम रातों में सोया करते थे!
उन हवाओं में उनके बदन कि महक होती थी
जो हवा के रुख को बदल देती थीं !
ऐ हवा आज क्यों उनकी कमी तेरे जेहन में लगती है
क्या मेरी तरह तेरा भी दीदार उनसे नहीं होता
इसलिए आजकल मेरा दिल हवा कि महक में नहीं खोता!
जब तू आती है तो ,थोडा उनके घर भी जाया कर
उनको साथ नहीं लेकिन उनकी महक ही लाया कर....!!
आज दिल करता है उन्ही पलो में वापस लौट जाऊ
लेकिन आज के पलो को वो एहसास कैसे दिलाऊ!
जब उनकी नज़रों से इन नज़रों का दीदार होता था
इस फिजा में अलग ही एहसास होता था !
लगता है इस दिल ने खुद को समझाना सीख लिया
जिस गम में तड़पते था शायद उसे दवाना सीख लिया!
मुझे अब भी लगता कि हवा कभी तो अपना रुख मोड़ेगी
मेरे दिल की बात को उन तक छोड़ेगी
उस पल में मेरी ही बात कि खनक होगी
शायद उस एहसास में उनकी ही महक होगी....!!!!!!!!









