बीते दिनों भारत के गणतंत्र ने अपने ६१ वर्ष पूरे किये है ,लेकिन देश में आज़ादी के बाद से प्रगति भी कुछ ज्यादा नहीं हुई है ! जब भारत ब्रिटिश शासन का का गुलाम था तब हम आजादी कि लड़ाई लड़ रहे थे और जब सन १९४७ में देश को स्वाधीनता मिली तब लक्ष्य रह गया कि देश को प्रगति कि राह पर लाना है ...........देश में इन ६४ वर्षो में प्रगति तो हुई लेकिन उस प्रगति को देश में हो रहे घोटालों/भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी गतिविधियों ने बोना बना दिया है ....भारत को आजादी तो मिल ही गयी , देश का संबिधान भी लागू हो गया,लेकिन आज देश के लोकतंत्र कि जड़ें कमजोर होती नजर आ रही है , आज भ्रष्टाचार आतंकवाद जैसी समस्याओं ने देश को अपना आशियाना बना लिया है आये दिनों दिनों देश के किसी ना किसी कोने में यह समस्याएं नए रूप में विकृत हो रही है चाहे वह २ स्पेक्ट्रम हो या आदर्श घोटाला इन सभी गतिविधियों ने देश को शर्मसार किया है भारत आज विकासशील देशो में शामिल तो हो गया लेकिन अभी तक विकसित नहीं हो पाया है ! आज देश में लोगो की सबसे बड़ी परेशानी बनी है महंगाई जिसने सभी वर्गों के लोगो के नाक में दम कर दिया है! महंगाई आये दिनों हवा में उड़ रही है,सभी क्षेत्रो में महंगाई ने अपने प्रकूप को फैला रखा है चाहे वह खाद्य क्षेत्र हो,शिक्षा क्षेत्र हो या ईधन (डीजल,पेट्रोल,रसोई गैस) क्षेत्र हर तरफ महंगाई की मार है !
जब तक आमजन की जिंदगी में ख़ुशी नहीं रहेगी अर्थात देश की प्रजा ही खुशहाल नहीं रहेगी तो देश कहा से प्रगति करेगा! जब तक देश में इन सभी प्रमुख समस्याओं पर लगाम नहीं लगेगी तब तक ना तो महंगाई कम होगी होगी ना ही देश विकसित होगा क्योकि देश की स्थिति किसी से छुपी नहीं है!!








